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शायरी – चिड़िया है मुंतजिर कि आप जाल डालिए
शायरी खंजर न शमशीर पर आप धार डालिए अपनी ही दो नजर से हमें मार डालिए मेरे मरमरी से दिल को कोई पूछता नहीं नाजुक से इस गुलाब को जरा तोड़ डालिए…