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शायरी – तुम थी मिली उस मोड़ पे, जिस मोड़ पे कोई न था
शायरी अपने भी सारे गैर थे, गैरों में अपना कोई न था तुम थी मिली उस मोड़ पे, जिस मोड़ पे कोई न था तेरे वजह से गीत के सुर-ताल को मैं पा सका पहले तो बस लफ्ज थे पर लय उनमें कोई न था…