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शायरी – ऐ इश्क माफ करना कि मैं रोता नहीं हूं अब
शायरी कच्ची उमर की याद थी, संजोता नहीं हूं अब ऐ इश्क माफ करना कि मैं रोता नहीं हूंअब कहीं हुस्न देख ली तो रास्ते बदल लिए तन्हाई की मंजिल को मैं खोता नहीं हूं अब…