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शायरी – दीदार को प्यासी रही मेरी दो अंखियां
शायरी दीवारों से घिरा है दिलबर का आशियां दीदार को प्यासी रही मेरी दो अंखियां किस अंजुमन में आके बुलबुल तू कैद है इस बाग में सैयाद की है बेरहम दुनिया…