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शायरी – कभी तो मिलोगी तुम उसी दरिया पे बैठे हुए
शायरी हम दरिया के पास थे शाम में बैठे हुए भीड़ से दूर तन्हाई में चुपचाप से बैठे हुए खामोशी का सिलसिला यूं ही चलता रहा जाने कितने दर्द थे दिल में भी बैठे हुए…