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शायरी – प्यासा है तू बरसों बरस से
उसी मोड़ पे क्यूं आया मुसाफिर जहां पर मैं पहले से ही खड़ी थी पल भर में तुमसे इश्क हुआ था पल भर ही तो निगाहें लड़ी थी…