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शायरी – तेरी नजर पड़ी, दरिया हुई शराब
उगने लगा है चाँद, आया चिरागे-रात पीने लगी है रूह, ये नूर की शराब दरिया को देख लो पानी थी अब तलक तेरी नजर पड़ी, दरिया हुई शराब शीशा-ए-जिस्म में है सुर्ख सी नमी बाहों में भर लिया हमने हसीं शराब …