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शायरी – कौन सा जुर्म किया था जो मुझे रूलाता था
कौन सा जुर्म किया था जो मुझे रूलाता था या ख़ुदा एक नज़र बस उसे तो देखा था कैसे बदलेंगे हम अपना सूफियाना मिज़ाज हुस्न को देखकर सज़्दे में जो झुकता था जिंदगी रह गई तेरे बिना गमे-तन्हा इस फकीरी की…