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शायरी – इश्क एक मजबूर ही इस जमीं पे कबसे है
चाँदनी बड़ी दूर ही आसमा पे कबसे है इश्क एक मजबूर ही इस जमीं पे कबसे है आज सुनता हूँ कहीं पर हो गया ये हादसा प्रेमियोँ को फूँकने का रस्म यहाँ पे कबसे है…