jazbat.com
शायरी – तन्हा ही रहने ही आदत है हमको
तन्हा ही रहने की आदत है हमको तो लोगों से मिलके क्या करें अपनी खबर जब हमको नहीं है तो किसके बारे में क्या कहें जब थे चले हम अपने सफर पे कोशिश तो की थी मिलने की सबसे लेकिन हमें तब तज़रबा हुआ था…