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शायरी – जागता है कोई दर्द ही सोने की जगह
चांद आया है फलक पे सूरज की जगह हो गई अब ये धरती रहने की जगह भीड़ लग जाती है दरिया पे अब शामों में कहां ढूंढेगी ये तन्हाई बैठने की जगह…