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शायरी – अपने भी, पराए भी, कुछ दूर के साथी हैं
शायरी दुनिया ने दीवानों को सदियों से है ठुकराया आजाद परिंदों को कोई न समझ पाया चलते हुए राहों पे देखूं मैं, सुनूं भी तो क्या जब शहर के लोगों में ये दिल ही ना मिल पाया…