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शायरी – चांद बदन को चूम रहा है, दरिया गुमसुम लेटी है
चांद बदन को चूम रहा है, दरिया गुमसुम लेटी है पंखा झलती है हवाएं, हलचल थोड़ी होती है बादलों की छत से सितारे, देख रहे हैं आंखें फाड़े बैठ गगन भी सोच रहा है, धरती सुंदर लगती है…