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शायरी – जानती हूं तुझे जाने कितनी सदी से
शायरी ठहर जा ऐ सावन, ठहर जा ऐ बादल बहने दे निगाहों से थोड़ा तो काजल छोड़के ओ फरिश्ते तुम जा न सकोगे जब चिड़िया तुम्हीं से हुई है रे घायल…