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शायरी – सबकी तरह बेदर्द थे हम जब इश्क से बेगाने थे
शायरी मैं परिंदा भी नहीं और हूं आस्मा भी नहीं लेकिन मेरा दिल इन दोनों से कम भी नहीं मेरा सबकुछ लुट गया, मैं वो खुशनसीब हूं आज दुनिया में कुछ खोने का गम भी नहीं…