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शायरी – आज फिर बिखर जाएगा कजरा बहकर
एक तक़लीफ़ उमड़ती है मेरे सीने में अरे बेदर्द आता है क्यूँ आँसू बनकर आज सँवरी हूं आईने में बस तेरे लिए आज फिर बिखर जाएगा कजरा बहकर…