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शायरी – मेरी मुंतज़िर निग़ाहों को हुस्न का रूप मिला
शायरी जख़्म दर जख़्म हम पाते गए कुछ न कुछ हर दर्द हर गम पे गाते गए कुछ न कुछ जो मुझे एक पल की खुशी दे न सके वो हर पल सितम ढ़ाते गए कुछ न कुछ…