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शायरी – ना जाने आज चाँद भी कहाँ खो गया
वो अंजुमन की आग में लिपटे हुए तारे आँसू के चिरागों से सुलगते नज़ारे आसमान की नज़र में अटके हुए सारे ना जाने आज चाँद भी कहाँ खो गया फलक का अँधेरा भी दरिया पे सो गया रोता है हर शै कि आज क्या ह…