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शायरी – कौन सा फूल चुनूँ तेरी बंदगी के लिए
दर्द इतना है जरूरी जिंदगी के लिए नूर जितना है जरूरी निगाहों के लिए तेरे इस हुस्न को देखके ये उलझन थी कौन सा फूल चुनूँ तेरी बंदगी के लिए…