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शायरी – ऐ सनम तेरे जैसा मेरा कोई दुश्मन न हुआ
उड़ रहा था मेरा दिल भी परिंदों की तरह तीर जब लग गई तो कोई भी मरहम न हुआ देख लेना था मुझे भी हर सितम की अदा ऐ सनम तेरे जैसा मेरा कोई दुश्मन न हुआ…