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शायरी – मैं भटकती हूँ जिस्म का आईना लेकर
एक तन्हा सा बदन है टूटे जीवन में जी रही हूँ लुटे दिल की दास्ताँ लेकर तेरा चेहरा नहीं है आज मेरे शीशे में मैं भटकती हूँ जिस्म का आईना लेकर…