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शायरी – जाने कैसा जादू किया है तूने मुझपे ओ कातिल
जाने कैसा जादू किया है तूने मुझपे ओ कातिल खंजर को सीने से हटाना, मेरे बस की बात नहीं जब तक ये यकीं न हो कि मुझे सीने से लगाओगे तब तक तेरे करीब जाना, मेरे बस की बात नहीं…