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शायरी – जो आँखें न उठा सके मेरे दर्द की तरफ
क्यूं हम कहीं पे जाएंगे तेरी तलाश में जब घर नहीं बसाना दिले-बर्बाद पर जो आंखें न उठा सके मेरे दर्द की तरफ वो कान क्या देंगे मेरी फरियाद पर…