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शायरी – क्या करूँ ये ही दिल की भाषा है
मेरे हर लफ्ज़ में निराशा है क्या करूँ ये ही दिल की भाषा है बेवफा होते हैं बोलने वाले हमें खामोशी का ही दिलासा है…