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शायरी – तुमसे तेरी ही शिकायत मैं भला कैसे करूं
जिंदगी तेरी इबादत मैं भला कैसे करूँ तुमसे तेरी ही शिकायत मैं भला कैसे करूँ दर्द को दिल में समेटा है मरने के लिए अब कोई भी चाहत मैं भला कैसे करूँ…