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शायरी – आबाद इस जहान में बर्बाद सा एक मुसाफिर
शायरी हर जाम पी गया मैं, ऐ दर्दे-जिंदगानी फिर भी बड़ा तरसा हूं, कुछ और शराब दे दो आबाद इस जहान में बर्बाद सा एक मुसाफिर है चांद थका-थका सा, कुछ और तलाश दे दो…