jazbat.com
शायरी – आई थी शाम बेकरार, आकर चली गई
हिंदी शायरी आई थी शाम बेकरार, आकर चली गई होना था बस इंतजार, होकर चली गई साहिल से दूर एक लहर आती मुझे दिखी आंखों से वो सागर पार, बहकर चली गई…