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शायरी – कितनी प्यासी थी ये लहरें रेतों के लिए
शायरी जो सुलगता नहीं हो वो चिरागां कैसा जो उजड़ता नहीं हो वो बहारां कैसा मैंने पत्थर को भी शीशे का टुकड़ा समझा बिना दिल के इन निगाहों का नजारा कैसा…