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शायरी – मेरी खामोशी में सिवा तेरे भला क्या मिलता
शायरी गूंजती है तेरी आवाज ही जिस्मो-जां में मेरी खामोशी में सिवा तेरे भला क्या मिलता जहां मातम ही मनाता हो बंदगी में कोई ऐसे मंदिर में कोई दीप भला क्या मिलता…