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शायरी – फिर कहां खो गए छोड़के मुझको एक दिन
अब तो मुझमें भी एक शाम ढल आई है जिसमें तू डूब गया छोड़के मुझको एक दिन सुनके शहनाई मेरे दर से तुम लौट गए फिर कहां खो गए छोड़के मुझको एक दिन…