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शायरी – सुन लो मैंने क्या सीखा है तेरे ही आईने से
शायरी देखता हूं आईना, देखता हूं कुछ नहीं अपनी सूरत के बारे में सोचता हूं, कुछ नहीं सुन लो मैंने क्या सीखा है तेरे ही आईने से देखता हूं मैं बस तुमको, बोलता हूं कुछ नहीं…