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शायरी – जी नहीं लगता आशियां में तेरे बिन शाम ढले
शायरी छू गई वो चांदनी काली घटा में छुप गई इश्क की शमा जलाकर वो शहर में खो गई हर अंधेरे में उजाला आस बनकर रहता है तेरे आने की हर आहट जुगनू बनकर बुझ गई…