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शायरी – अपनी ये दर्द भरी दास्तां सुनाता भी नहीं
शायरी कभी मेरे दर पे तू भूलकर आता भी नहीं अपनी कोई दर्द भरी दास्तां सुनाता भी नहीं तेरे साये को भी मालूम नहीं मेरा नाम-पता जुबां तो है मगर तू मुझसे पूछता भी नहीं…