jazbat.com
शायरी – इश्क तन्हा ही रहता है बेजुबां बनकर
शायरी जल रहा है मेरी नजरों में मेरा वो खुदा चांद बुझता ही नहीं होकर सूरज से जुदा इश्क तन्हा ही रहता है बेजुबां बनकर और आशिक भी होता है हर बयां से जुदा…