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शायरी – जलते हुए खिजां में ये सावन कहां से आया
जलते हुए खिजां में ये सावन कहां से आया प्यासी सी जमीं पे मैं बरसात में रहता हूं अब ऐसी फकीरी है, क्या खोना है क्या पाना जो रहगुजर सूनी हो, उस ओर ही चलता हूं…