jazbat.com
शायरी – जख्म जब-जब दिल में मेरे इश्क में जल उठा
मिट्टी का हर दर्द तो फूल बनकर खिल गया मेरे सीने में भी गम का एक हसीन गुलाब था जख्म जब-जब दिल में मेरे इश्क में जल उठा आंख से पानी बहे, उस पानी में भी आग था…