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शायरी – यही इश्क का अंजाम था, ये जुबां भी नाकाम था
तुझे बोलने से गुरेज था, मुझे पूछने से परहेज था यही इश्क का अंजाम था, ये जुबां भी नाकाम था तेरा देखकर मुंह मोड़ना, मेरा देखकर राह छोड़ना नजर में कुछ अरमान थे, बेरूखी में भी पैगाम था…