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शायरी – दिल की एक नाजुक कली पे दर्द के शबनम रखे हैं
शायरी भीगी भीगी दो निगाहें, सहमे-सहमे लबों का जोड़ा जुल्फें सावन सी घनेरी, सूरत पे हया का बसेरा गोरे बदन की चांदनी में मौसम में फैला है उजाला तेरे शबाब की आग में जलकर रोज आता है सबेरा…