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शायरी – जिगर में आग है जब तक, हरेक दीपक जला लेंगे
जिगर में आग है जब तक, हरेक दीपक जला लेंगे नजर में अश्क है जब तक, हरेक मंजर बहा देंगे मुझे भी मौत के साये से डर लगता है ऐ मालिक मगर जब तुम कहोगी तब हरेक खंजर चुभा लेंगे…