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शायरी – रात तड़प के गुजर गई और चांद तन्हा रह गया
शायरी रात तड़प के गुजर गई और चांद तन्हा रह गया आस्मा के मंजर में एक दर्द गूंजकर खो गया गमजदा सूरत पे देखो मायूसी के साये हैं जबसे हमको छोड़ गए हो, हुस्न हमारा खो गया…