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शायरी – राज ए मुहब्बत इज़हार के काबिल नहीं होता | shayari-love shayari-hindi shayari
अभी मसरूफ हो तुम अपनी ही उलझन में मेरे जज़्बात को कहीं तुम न समझ लो पत्थर राज-ए-मुहब्बत इज़हार के काबिल नहीं होता दर्द-ए-खामोशी पढ़ लो तुम मेरी सूरत देखकर…