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शायरी – कांटों के अंजुमन में खिलके बड़े हुए
कांटों के अंजुमन में खिलके बड़े हुए गुलाब खूने-दिल के रंग में रंगे हुए मौसम की सर्दियों से कैसे बचें हम जब आग ही दामन में पड़े हैं बुझे हुए…