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शायरी – ये मुहब्बत भी कश्मीर बनके रह गई
इस जमाने के तानों को सुनते-सुनते ये तमाशा मेरी तकदीर बनके रह गई सरहदें पारकर हम-तुम न मिल पाए कभी ये मुहब्बत भी कश्मीर बनके रह गई…