jazbat.com
शायरी – यूं तो मिले थे कितनों से लेकिन कोई तुम्हारे जैसा नहीं था
यूं तो मिले थे कितनों से लेकिन कोई तुम्हारे जैसा नहीं था निगाहों को कुछ भी भाता नहीं था जब तक तुझे हमने देखा नहीं था…