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शायरी – जिस सादगी में नूर हो, वो हुस्न ही मेहताब है | shayari-love shayari-hindi shayari
जो गुमां करे इस नक्श पे, वो अक्स भी एक खाक है जिस सादगी में नूर हो, वो हुस्न ही मेहताब है जिस नजर में खुमार हो,जो जिगर से जांनिसार हो जिसे जलके ही करार हो, वो इश्क ही आफताब है…