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शायरी – दो बरस की बात थी, गुमनाम सी मुलाकात थी | shayari-love shayari-hindi shayari
मैं उस मोड़ पे रुका, जाने क्या दिल में उठा कुछ देखा न सुना, एक नज्म मैंने बुना