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शायरी – यही दिलजलों की तकदीर है शायद
चल पड़ा है अकेला ही एक सितारा कोई मंजिल कहीं मुंतजिर है शायद एक आग सी उठती है सीने में कहीँ यही दिलजलों की तकदीर है शायद…