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कालान्तर – Then And Now
कैशोर्य के उन दिनों में मैं सुबह की ख़ुशियों से भर जाता था, पर शामों में रुदन ही रुदन था ; अब, जबकि मैं बूढ़ा हूँ हर दिन उगता है शंकाओं से आच्छन्न, तो भी इसकी सन्ध्याएँ पावन हैं, शान्त और प्रसन्न ।…