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कुछ ख़याल कुछ लब़्ज़
दर्दकी सुराही, भर के आँसुओ से जीओ मॅय ज़िंदगीका समज़ के उसे पीओ। भरके आँखोमें रोज़ सपनोकी रोशनी दिवाली अपनी अमावसोकी करके जीओ । . . . . . . . . . . बुइने लगी है आग ज…