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रात पश्मीने की – गुलज़ार
ऐसे आई है तेरी याद अचानक जैसे पगडंडी कोई पेड़ों से निकले इक घने माज़ी के जंगल में मिली हो । । : – : – : – : – : – : – : – : जिस्म के खोल के अ…